भारतीय साहित्य, सिनेमा और टेलीविजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज लेखक और फिल्ममेकर वेद राही अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने रविवार सुबह महाराष्ट्र के ठाणे जिले स्थित अपने आवास पर 93 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन से साहित्य और मनोरंजन जगत में शोक की लहर है। रविवार दोपहर ठाणे के कोपरी श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके परिवार में दो बेटियां गीतांजलि और पूनम हैं। वेद राही का जाना उस रचनात्मक शख्सियत का बिछड़ना है, जिसने अपनी कहानियों और लेखन से कई पीढ़ियों के दर्शकों और पाठकों को प्रभावित किया।
वेद राही ने अपने लंबे करियर में साहित्य के साथ-साथ हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को भी अहम योगदान दिया। उन्होंने 25 से अधिक फिल्मों के लिए पटकथा और संवाद लिखे थे। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'ये रात फिर न आएगी', 'आप आए बहार आई', 'बेईमान', 'मोम की गुड़िया' और 'बेजुबान' जैसे नाम शामिल हैं। उनके लेखन की खासियत यह थी कि वह कहानी और किरदारों को प्रभावशाली अंदाज में पर्दे पर उतारने की क्षमता रखते थे। फिल्मों के लिए लिखते हुए भी उन्होंने अपनी साहित्यिक संवेदना और कहानी कहने की अलग पहचान को बरकरार रखा।
लेखन के बाद वेद राही ने निर्देशन में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उन्होंने 'प्रेम पर्वत' और 'काली घटा' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया, जबकि साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म 'वीर सावरकर' की कमान भी उन्होंने संभाली थी। उनकी कुछ फिल्में, खासकर 'प्रेम पर्वत' और 'काली घटा', आज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन उनके काम का महत्व सिनेमा के इतिहास में अपनी जगह बनाए हुए है। एक लेखक से निर्देशक तक का उनका सफर उनकी बहुमुखी प्रतिभा और रचनात्मक जिज्ञासा को दर्शाता है।
टेलीविजन की दुनिया में भी वेद राही का योगदान बेहद खास रहा। 1980 और 1990 के दशक के दर्शकों के बीच उन्हें दूरदर्शन के लोकप्रिय धारावाहिक 'गुल गुलशन गुलफाम' के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। इसके अलावा 'मीरा' और 'रिश्ते' जैसे शोज से भी उनका जुड़ाव रहा। उनके लेखन ने छोटे पर्दे पर ऐसी कहानियां पेश कीं, जिनसे दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़ सके। यही वजह है कि फिल्मों और साहित्य के साथ-साथ टेलीविजन के दर्शकों के दिलों में भी उनकी रचनाएं लंबे समय तक जीवित रहेंगी।
मई 1933 में जम्मू में जन्मे वेद राही का संबंध एक ऐसे परिवार से था, जिसकी जड़ें पत्रकारिता से जुड़ी थीं। उनके पिता मुल्क राज सराफ क्षेत्र के जाने-माने शुरुआती पत्रकारों में गिने जाते थे। वेद राही ने अपने लेखकीय सफर की शुरुआत जम्मू से की और डोगरी भाषा में लेखन के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। बाद में वह फिल्म इंडस्ट्री में काम करने मुंबई पहुंचे, जहां उनका रचनात्मक संसार साहित्य से आगे बढ़कर फिल्मों और टेलीविजन तक फैल गया। अपनी मातृभाषा में कहानियां लिखने से लेकर हिंदी सिनेमा के लिए पटकथा और संवाद रचने तक, उन्होंने हर माध्यम में अपनी छाप छोड़ी। उनका काम आने वाले समय में भी उनकी याद दिलाता रहेगा