कनाडा के टोरंटो में 'कैनेडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग' (CHORD) द्वारा आयोजित 'हिंदू विश्व बंधु' सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारतीय दर्शन और वसुधैव कुटुंबकम के सार्वभौमिक विचार पर प्रकाश डाला। प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भागवत ने जोर देकर कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति विविधता को किसी चुनौती के बजाय एकता की सबसे बड़ी शक्ति मानती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सोच कभी भी विस्तारवाद या धार्मिक परिवर्तन पर आधारित नहीं रही, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, आयुर्वेद और मानवतावादी मूल्यों को दुनिया के साथ साझा करने की रही है।
कार्यक्रम के दौरान कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। केनी ने अपने संबोधन में भारत और कनाडा के कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में आ रही नई गर्माहट और मजबूती की सराहना की। उन्होंने जब 2026 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित कनाडा दौरे का जिक्र किया, तो पूरा प्रेक्षागृह 'मोदी-मोदी' के नारों से गूंज उठा, जो प्रवासी भारतीयों के बीच भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और उत्साह को दर्शाता है।
मोहन भागवत ने कहा कि जब हिंदू समाज जागृत होता है, तो पूरी दुनिया का कल्याण होता है क्योंकि भारत की प्रगति केवल आर्थिक लाभ तक सीमित न होकर संपूर्ण मानवता की सेवा के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि संकट के समय बिना किसी स्वार्थ के दुनिया की मदद करना भारत की सनातन परंपरा का हिस्सा रहा है। सांस्कृतिक लोकगीतों और विविधता में एकता के संदेश के साथ संपन्न हुआ यह कार्यक्रम कनाडा में भारतीय समुदाय के सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पड़ाव साबित हुआ।