उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची (Voter List) में सामने आई अजीबोगरीब और त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों नेसोशल मीडिया पर काफी तूल पकड़ लिया था। सूचियों में नाम, पिता के नाम या पते की जगह अड़ियल और अजीब हिंदी अनुवाद आने के कारणनिर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे थे और इसे लेकर जातिवादी या राजनीतिक टिप्पणियां भी वायरल होने लगी थीं।
इस पूरे विवाद पर संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट की है और आधिकारिक सफाईजारी की है।
सॉफ्टवेयर की तकनीकी चूक (Translation Glitch): मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्वीकार किया कि डिजिटल पोर्टल और सॉफ्टवेयर की खामी केकारण अंग्रेजी से हिंदी में नाम ट्रांसफर/अनुवाद होने में यह बड़ी गड़बड़ी हुई है। उदाहरण के तौर पर, यदि अंग्रेजी में नाम 'Ramhit Yadav' दर्ज करतेसमय थोड़ा गैप आ गया (जैसे Ram hit Yadav), तो सॉफ्टवेयर ने उसे ट्रांसलिट्रेशन (ध्वनि के आधार पर लिखने) की बजाय शाब्दिक अनुवाद(Translation) मान लिया और वह हिंदी में 'राम ने यादव को मारा' के रूप में दर्ज हो गया। इसी प्रकार कुछ अन्य स्थानों पर भी ऐसी ही तकनीकीऔर मानवीय गलतियां सामने आईं।
मानवीय लापरवाही: कुछ मामलों में (जैसे पिता के नाम की जगह 'B.Com' दर्ज होना) इसे जिला स्तर पर डेटा फीडिंग के दौरान हुई मानवीय भूलऔर कर्मचारियों की लापरवाही माना गया है।
आंकड़े बेहद कम: CEO कार्यालय के अनुसार, राज्य की 11 स्नातक और शिक्षक निर्वाचन सीटों पर कुल 14.81 लाख से अधिक मतदाताओं केनाम दर्ज हैं, जिनमें से जांच के बाद कुल 158 स्थानों पर ऐसी त्रुटियां पाई गई हैं। कुल डेटा के मुकाबले यह संख्या बेहद कम है, फिर भी इसे तुरंतगंभीरता से लिया गया है।
शिकायतें सही पाए जाने के बाद निर्वाचन आयोग ने त्वरित कदम उठाते हुए इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रोंकी सूचियों की गहन जांच कराई। मंडलायुक्त स्तर से जांच रिपोर्ट आने के बाद इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार संबंधित अधिकारियों और डेटा एंट्रीऑपरेटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की तकनीकी कमियों को भविष्य में पूरीतरह दुरुस्त किया जा रहा है ताकि किसी भी मतदाता को असुविधा न हो।