वॉशिंगटन / इरकुत्स्क: रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 वर्षीया शोधकर्ता दरिया शिपिलोवा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इस पूरे मामले पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। हालांकि सीडीसी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में अमेरिका या वैश्विक स्तर पर किसी बड़े खतरे के तात्कालिक संकेत नहीं हैं, फिर भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।
रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों और उपभोक्ता संरक्षण संस्था 'रोस्पोत्रेब्नादजोर' के अनुसार, मृत शोधकर्ता में अज्ञात कारणों से निमोनिया के लक्षण देखे गए थे। एहतियात के तौर पर शेलेखोव और इरकुत्स्क क्षेत्र में लगभग 200 लोगों को चिकित्सीय देखरेख व आइसोलेशन में रखा गया। राहत की बात यह है कि संपर्क में आए सभी व्यक्तियों के शुरुआती लैब टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आए हैं और किसी में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस घटना ने हलचल तेज कर दी है। अमेरिकी प्रशासन ने स्थिति का आकलन करने के लिए अंतर-एजेंसी वार्ताओं का दौर शुरू किया है। विदेश विभाग ने रूस के लिए यात्रा संबंधी परामर्श जारी करते हुए पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, न्यूमोनिक प्लेग एयरबोर्न ड्रॉपलेट्स के माध्यम से तेजी से फैल सकता है, परंतु शुरुआती चरण में एंटीबायोटिक उपचार से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। फिलहाल वैश्विक निगरानी तंत्र सतर्क है ताकि किसी भी संभावित जोखिम को समय रहते टाला जा सके।